हनुमान जी के प्रसिद्ध श्लोक, मंत्र और स्तुति का अर्थ सहित संकलन। जानिए hanuman ji shlok in Sanskrit with meaning, hanuman ji mantra और हनुमान जी की स्तुति श्लोक जो जीवन में शक्ति और शांति लाते हैं।
Introduction
हनुमान जी शक्ति, भक्ति और निडरता के प्रतीक हैं। उनका नाम लेने से मनोबल बढ़ता है और भय दूर होता है। hanuman ji shlok का पाठ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानसिक स्थिरता और आत्मविश्वास का माध्यम भी है। आज हम इस लेख में hanuman ji manta in sanskrit with meaning, hanuman ji ki stuti, shlok aur mantra को उनके अर्थ सहित जानेंगे।
हनुमान श्लोक का महत्व
हनुमान जी के श्लोक हमारे मन में साहस और विश्वास जगाते हैं। कहा गया है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से hanuman ji shlok का जप करता है, उसके जीवन से नकारात्मकता, भय और निराशा दूर होती है। ये श्लोक केवल श्रद्धा नहीं बल्कि आत्मबल के भी स्रोत हैं।
hanuman ji shlok in Sanskrit with meaning
नीचे पाँच प्रमुख hanuman ji shlok in sanskrit with meaning दिए गए हैं जो हनुमान भक्ति के सबसे प्रसिद्ध श्लोक माने जाते हैं।
| संस्कृत श्लोक | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| ॐ हनुमंते नमः। | हे हनुमान जी, आपको नमस्कार! कृपया मेरे सभी दुख और भय को दूर करें। |
| मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥ | मैं उन श्री हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ जो वायु के समान वेगवान, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ और श्रीराम के दूत हैं। |
| आञ्जनेय मतिपाटलाननं काञ्चनाद्रिकमनीय विग्रहम्। पारिजात तरुमूल वासिनं भावयामि पवमान नन्दनम्॥ | हे अंजनीपुत्र, आपका चेहरा कमल जैसा लाल और शरीर स्वर्ण पर्वत के समान उज्ज्वल है। मैं आपका ध्यान करता हूँ। |
| अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्। दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्॥ | आप अपार बल के धाम हैं, स्वर्ण पर्वत जैसे देह वाले हैं, असुरों के शत्रु और ज्ञानी लोगों में अग्रणी हैं। |
| जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ | हे हनुमान जी, आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं, तीनों लोकों में आपकी महिमा प्रसिद्ध है। |
Hanuman ji shlok one line (हनुमान जी के 1 पंक्ति वाले)
- ॐ हनुमते नमः। — हनुमान जी को नमस्कार, जो हर संकट में रक्षा करते हैं।
- ॐ श्री हनुमते नमः। — श्री हनुमान जी की कृपा सदा हम पर बनी रहे।
- ॐ रामदूताय नमः। — श्रीराम के संदेशवाहक हनुमान जी को नमन।
- ॐ पवनपुत्राय नमः। — पवनदेव के पुत्र को प्रणाम, जो शक्ति और साहस के प्रतीक हैं।
- ॐ अञ्जनिसुताय नमः। — माता अंजना के पुत्र हनुमान जी को प्रणाम।
hanuman ji shlok 2 line (हनुमान जी के 2 पंक्ति वाले)
- जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ — हे हनुमान जी, आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं।
- संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा॥ — हनुमान जी के स्मरण से सभी संकट दूर होते हैं।
- नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ — जो हनुमान जी का निरंतर जाप करता है, उसके सारे रोग और कष्ट मिट जाते हैं।
- जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥ — हे प्रभु, अपने भक्तों पर वैसे ही कृपा करें जैसे गुरु अपने शिष्य पर करता है।
- जय हनुमान संत हितकारी, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ — हे भक्तवत्सल हनुमान, हमारी प्रार्थना सुनिए और संकट हरिए।
hanuman ji mantra for positivity & strength
हनुमान जी के ये पाँच शक्तिशाली hanuman ji shlok mantra जीवन में ऊर्जा, आत्मबल और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
| हनुमान मंत्र | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| ॐ हनुमते नमः। | हनुमान जी को नमस्कार, जो हमारे रक्षक और संकटमोचक हैं। |
| ॐ श्री हनुमते नमः। | श्री हनुमान जी की कृपा से हमारा जीवन सुरक्षित और सफल हो। |
| ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विस्फोटनकराय सर्वदुःखनिवारणाय सर्वरोगाय हनुमते नमः॥ | मैं उन रुद्रावतार हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ जो सभी दुख और रोगों को नष्ट करते हैं। |
| ॐ अञ्जनिसुत हनुमानाय नमः। | हे अंजनीपुत्र हनुमान, हमारी बुद्धि और बल को बढ़ाइए। |
| ॐ रामदूताय हनुमते नमः। | श्रीराम के प्रिय दूत हनुमान जी को नमन, जो भक्तों के जीवन में प्रकाश लाते हैं। |
इनका नियमित जप “हनुमान जी मंत्र सिद्धि” प्रदान करता है और मन में अदम्य शक्ति का संचार करता है।
हनुमान जी की स्तुति श्लोक (हनुमान स्तुति श्लोक अर्थ सहित)
हनुमान जी की स्तुति से व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है और मन में स्थिरता आती है। नीचे पाँच प्रसिद्ध हनुमान स्तुति श्लोक अर्थ सहित दिए गए हैं:
| स्तुति श्लोक | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| अञ्जनीसुत वीर हनुमान, रामदूत अतुलित बलधाम॥ | हे अंजनीपुत्र वीर हनुमान, आप श्रीराम के दूत और अपार बल के धाम हैं। |
| जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ | आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं और तीनों लोकों में आपकी कीर्ति व्याप्त है। |
| भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे॥ | हनुमान जी का नाम लेने से सभी नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं। |
| लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर॥ | हनुमान जी का शरीर लाल वर्ण का है और उनका रूप अद्भुत है। |
| जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥ | हे प्रभु, अपने भक्तों पर वैसे ही कृपा करें जैसे गुरु अपने शिष्य पर करते हैं। |
hanuman ji shlok in Bhagavad Geeta
श्रीमद्भगवद् गीता में भले ही hanuman ji shlok का सीधा उल्लेख नहीं मिलता, लेकिन उनके भाव और आदर्श पूरे ग्रंथ में बसे हुए हैं। अर्जुन के रथ के ध्वज पर हनुमान जी का होना यह दर्शाता है कि वे स्वयं गीता के “कर्मयोग” और “भक्ति योग” के सजीव प्रतीक हैं।
हनुमान जी ने जीवन भर वही किया जो गीता सिखाती है — निस्वार्थ कर्म, पूर्ण समर्पण और ईश्वर भक्ति। गीता के उपदेशों में जो शांति, शक्ति और श्रद्धा का संदेश है, वही भावना हनुमान जी के हर श्लोक में झलकती है।
अगर आप गीता के प्रसिद्ध श्लोकों के अर्थ भी पढ़ना चाहते हैं, तो यह लेख ज़रूर देखें Geeta Shlok in Sanskrit with Meaning in Hindi — इसमें गीता के महत्वपूर्ण श्लोकों और उनके अर्थ को बहुत सरल भाषा में समझाया गया है।
Connection with Ancient Scriptures
वाल्मीकि रामायण और सुंदरकांड में हनुमान जी की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन मिलता है। श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा, नम्रता और वीरता हर युग के लिए प्रेरणा है। इन ग्रंथों के hanuman ji shlok in sanskrit आज भी भक्ति और शक्ति का अद्भुत स्रोत हैं।
Conclusion: Hanuman mantra with hindi translation
हनुमान जी के श्लोक और मंत्र हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। नियमित रूप से hanuman ji shlok in sanskrit with meaning का जप करने से मन, बुद्धि और आत्मबल तीनों मजबूत होते हैं। हनुमान जी की कृपा से हर संकट दूर हो और जीवन में शक्ति, साहस और सफलता बनी रहे — यही इस लेख का सार है।
FAQs for Hanuman ji Manta and Shlok
1. हनुमान का प्रसिद्ध श्लोक कौन सा है?
हनुमान जी का सबसे प्रसिद्ध श्लोक “मनोजवं मारुततुल्यवेगं” है। यह श्लोक उनकी बुद्धि, शक्ति और श्रीराम के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है और भक्तों द्वारा रोज़ पढ़ा जाता है।
2. हनुमान जी का मूल मंत्र क्या है?
हनुमान जी का मूल मंत्र है – “ॐ हनुमते नमः।” इस मंत्र के जाप से जीवन के सभी संकट, भय और मानसिक तनाव समाप्त होते हैं। इसे रोज़ 108 बार जपना अत्यंत फलदायी माना गया है।
3. हनुमान जी का प्रिय मंत्र कौन सा है?
हनुमान जी का प्रिय मंत्र “जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥” है। यह दोहा भक्तों के हृदय में शक्ति और विश्वास का संचार करता है तथा हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है।

